रसोईघर के लिए वास्तु टिप्स: सही दिशा और उपाय

रसोईघर के लिए वास्तु टिप्स: सही दिशा, उपकरण की स्थिति और वास्तु दोष निवारण | Jeevan Gyan

रसोईघर के लिए वास्तु टिप्स: सही दिशा और उपाय जो लाएं सुख-समृद्धि

रसोईघर, जिसे घर का हृदय भी कहा जाता है, न केवल भोजन पकाने का स्थान है बल्कि यह पूरे परिवार के स्वास्थ्य, धन और खुशहाली का स्रोत भी है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोईघर की सही दिशा, उसका लेआउट और उसमें रखी वस्तुओं का स्थान घर की ऊर्जा और सदस्यों के जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है। यदि रसोईघर वास्तु नियमों के अनुरूप न हो, तो यह न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है, बल्कि आर्थिक परेशानियों और पारिवारिक कलह का कारण भी बन सकता है। इस विस्तृत लेख में, हम रसोईघर के लिए वास्तु शास्त्र के महत्वपूर्ण सिद्धांतों, आदर्श दिशाओं, उपकरणों की सही स्थिति और वास्तु दोष निवारण के सरल उपायों पर गहराई से चर्चा करेंगे, ताकि आपका रसोईघर सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र बन सके।

वास्तु शास्त्र और रसोईघर का महत्व

भारतीय प्राचीन विज्ञान वास्तु शास्त्र, जो दिशाओं और पंच महाभूतों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) के संतुलन पर आधारित है, घर के हर कोने के लिए विशिष्ट नियम प्रदान करता है। रसोईघर, अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है और अग्नि देव का स्थान माना जाता है। भोजन पकाने की प्रक्रिया अग्नि के माध्यम से ही संभव होती है, और यह अग्नि ही हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। इसलिए, रसोईघर में अग्नि तत्व का सही स्थान पर होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि अग्नि तत्व गलत दिशा में हो, तो यह असंतुलन पैदा कर सकता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, पाचन संबंधी विकार, आर्थिक अस्थिरता और घर में बेचैनी का माहौल उत्पन्न हो सकता है। वास्तु के अनुसार व्यवस्थित रसोईघर न केवल पौष्टिक भोजन प्रदान करता है, बल्कि घर में सकारात्मकता, शांति और समृद्धि भी लाता है।

रसोईघर की आदर्श दिशा: वास्तु के नियम

रसोईघर की दिशा का निर्धारण करते समय, अग्नि तत्व के प्राकृतिक स्थान को समझना आवश्यक है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में रसोईघर के लिए सबसे शुभ और आदर्श दिशाएं निम्नलिखित हैं:

1. दक्षिण-पूर्व दिशा (आग्नेय कोण) - सबसे उत्तम

  • कारण: दक्षिण-पूर्व दिशा अग्नि तत्व से संबंधित है और इसके स्वामी अग्नि देव हैं। इस दिशा में रसोईघर होने से अग्नि तत्व प्राकृतिक रूप से संतुलित रहता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • लाभ: इस दिशा में बना रसोईघर घर के सदस्यों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, पाचन शक्ति को मजबूत करता है और धन संबंधी मामलों में स्थिरता व वृद्धि लाता है। यह परिवार में शांति और सामंजस्य बनाए रखने में भी मदद करता है।

2. उत्तर-पश्चिम दिशा (वायव्य कोण) - वैकल्पिक

  • कारण: यदि दक्षिण-पूर्व दिशा में रसोईघर बनाना संभव न हो, तो उत्तर-पश्चिम दिशा एक वैकल्पिक विकल्प हो सकती है। यह वायु तत्व की दिशा है, और वायु अग्नि को सहायता करती है।
  • सावधानियां: इस दिशा में रसोईघर होने पर, अग्नि तत्व को नियंत्रित रखने के लिए विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। यह दिशा दक्षिण-पूर्व जितनी शक्तिशाली नहीं मानी जाती, और कभी-कभी परिवार के सदस्यों के बीच बेचैनी या मेहमानों के लगातार आने-जाने का कारण बन सकती है।

इन दिशाओं में रसोईघर बनाने से बचें:

  • उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण): यह जल तत्व और ईशान देव की दिशा है, जिसे पूजा घर या ध्यान के लिए पवित्र माना जाता है। इस दिशा में अग्नि तत्व का होना गंभीर वास्तु दोष पैदा कर सकता है, जिससे स्वास्थ्य समस्याएं, आर्थिक नुकसान और मानसिक अशांति होती है। अग्नि और जल का टकराव हानिकारक होता है।
  • दक्षिण-पश्चिम दिशा (नैऋत्य कोण): यह पृथ्वी तत्व और राहु का स्थान है। इस दिशा में रसोईघर होने से घर के मुखिया या मुख्य महिला के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यह धन की हानि और रिश्तों में तनाव का कारण भी बन सकता है।
  • उत्तर दिशा: यह कुबेर की दिशा है, जो धन और अवसर से जुड़ी है। इस दिशा में रसोईघर होने से धन का अपव्यय और व्यावसायिक नुकसान हो सकता है।
  • दक्षिण दिशा: यह यमराज की दिशा है। इस दिशा में रसोईघर कुछ हद तक स्वीकार्य हो सकता है, लेकिन यह दक्षिण-पूर्व जितना शुभ नहीं है।
  • पश्चिम दिशा: यह शनि देव की दिशा है। पश्चिम दिशा में रसोईघर होने से आर्थिक परेशानियां और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, खासकर महिलाओं के लिए।

रसोईघर में विभिन्न उपकरणों की सही स्थिति

रसोईघर में केवल दिशा ही नहीं, बल्कि विभिन्न उपकरणों का सही स्थान भी बहुत मायने रखता है। प्रत्येक उपकरण एक विशेष ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है और उसका स्थान वास्तु नियमों के अनुरूप होना चाहिए:

1. खाना पकाने का चूल्हा/गैस स्टोव

  • आदर्श स्थान: रसोईघर के दक्षिण-पूर्व कोने में।
  • खाना बनाते समय मुख: खाना बनाने वाले व्यक्ति का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। यह स्वास्थ्य, सकारात्मक ऊर्जा और धन वृद्धि के लिए शुभ माना जाता है। यदि पूर्व संभव न हो तो उत्तर दिशा भी स्वीकार्य है।
  • क्या न करें: चूल्हे को मुख्य दरवाजे के ठीक सामने या खिड़की के नीचे न रखें। यह भी सुनिश्चित करें कि चूल्हा और सिंक एक-दूसरे के बहुत करीब न हों, क्योंकि यह अग्नि और जल तत्वों का टकराव है।

2. पानी का सिंक और नल

  • आदर्श स्थान: रसोईघर के उत्तर-पूर्व दिशा में। यह जल तत्व की दिशा है।
  • महत्वपूर्ण बिंदु: सिंक को चूल्हे से पर्याप्त दूरी पर रखें। यदि जगह की कमी हो, तो दोनों के बीच एक लकड़ी का विभाजन या चीनी मिट्टी की कोई वस्तु रख सकते हैं ताकि नकारात्मक ऊर्जा का संचार न हो।
  • क्या न करें: सिंक को दक्षिण-पूर्व में चूल्हे के पास या दक्षिण-पश्चिम में न रखें।

3. फ्रिज

  • आदर्श स्थान: दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पश्चिम, दक्षिण या पश्चिम दिशा में।
  • क्या न करें: फ्रिज को उत्तर-पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा में न रखें, क्योंकि यह इन पवित्र और अग्नि को समर्पित दिशाओं में तत्वों का असंतुलन पैदा कर सकता है। दरवाजे के ठीक सामने भी फ्रिज रखने से बचें।

4. माइक्रोवेव और ओवन

  • आदर्श स्थान: चूल्हे की तरह ही, माइक्रोवेव और ओवन भी अग्नि तत्व से संबंधित उपकरण हैं, इसलिए इन्हें दक्षिण-पूर्व कोने में रखना सबसे शुभ होता है।
  • क्या न करें: इन्हें पानी के स्रोतों के पास न रखें।

5. अनाज और खाद्य सामग्री भंडारण

  • आदर्श स्थान: रसोईघर के दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण या पश्चिम दिशा में। ये दिशाएं स्थिरता और पृथ्वी तत्व से संबंधित हैं, जो भंडारण के लिए आदर्श हैं।
  • लाभ: इस दिशा में अनाज रखने से घर में अन्न की कमी नहीं होती और समृद्धि बनी रहती है।
  • क्या न करें: उत्तर-पूर्व या उत्तर दिशा में भंडारण से बचें, क्योंकि यह धन और पवित्रता से संबंधित दिशाएं हैं।

6. कूड़ेदान

  • आदर्श स्थान: रसोईघर के उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम कोने में।
  • महत्व: कूड़ेदान नकारात्मक ऊर्जा और अपशिष्ट का प्रतीक है। इसे ऐसी जगह रखें जहां से यह आसानी से दिखाई न दे और मुख्य द्वार से दूर हो।
  • क्या न करें: कूड़ेदान को उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पूर्व, उत्तर या पूर्व दिशा में न रखें। इसे हमेशा ढंक कर रखें और नियमित रूप से खाली करें।

7. बिजली के उपकरण (मिक्सर, टोस्टर आदि)

  • आदर्श स्थान: इन्हें दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना उचित होता है।

रसोईघर की आंतरिक सज्जा और रंग

रसोईघर की दीवारों के रंग और फर्श का चुनाव भी वास्तु के अनुसार करना चाहिए, क्योंकि रंग भी ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करते हैं:

1. दीवारों के रंग

  • शुभ रंग: नारंगी, लाल (हल्के शेड), पीला, क्रीम, चॉकलेट ब्राउन। ये रंग अग्नि तत्व को बढ़ावा देते हैं और सकारात्मकता लाते हैं।
  • क्या न करें: गहरे नीले, काले या गहरे भूरे रंगों से बचें, क्योंकि ये निराशा और नकारात्मकता ला सकते हैं। सफेद रंग भी बहुत अधिक उपयोग करने से बचें क्योंकि यह अग्नि तत्व को कमजोर कर सकता है।

2. फर्श

  • शुभ रंग: हल्के रंग जैसे क्रीम, ऑफ-व्हाइट, हल्के भूरे रंग के टाइल्स या पत्थर का उपयोग करें। ये रंग शांति और स्वच्छता का प्रतीक हैं।
  • क्या न करें: गहरे या भड़कीले रंगों का उपयोग करने से बचें।

3. खिड़कियां और वेंटिलेशन

  • आदर्श दिशा: रसोईघर में खिड़की पूर्व या उत्तर दिशा में होनी चाहिए, ताकि ताजी हवा और प्राकृतिक प्रकाश पर्याप्त मात्रा में आ सके।
  • महत्व: उचित वेंटिलेशन धुएं और नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकालने के लिए महत्वपूर्ण है। एक एग्जॉस्ट फैन पूर्व दिशा की दीवार पर होना चाहिए।

रसोईघर में ध्यान रखने योग्य अन्य वास्तु टिप्स

कुछ अतिरिक्त नियम भी हैं जिनका पालन करने से रसोईघर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है:

  • रसोईघर का दरवाजा: रसोईघर का दरवाजा दक्षिण-पश्चिम दिशा को छोड़कर किसी भी दिशा में हो सकता है। दरवाजे को उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व में रखना शुभ होता है। मुख्य प्रवेश द्वार के ठीक सामने रसोईघर का दरवाजा नहीं होना चाहिए।
  • पूजा घर और शौचालय से दूरी: रसोईघर को कभी भी पूजा घर या शौचालय के ऊपर, नीचे या पास में नहीं होना चाहिए। यह गंभीर वास्तु दोष है, जो घर में नकारात्मक ऊर्जा और स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है।
  • टूटी हुई या खराब वस्तुएं: रसोईघर में कभी भी टूटे हुए बर्तन, खराब उपकरण या अन्य अनुपयोगी वस्तुएं न रखें। ये नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं। इन्हें तुरंत ठीक करवाएं या हटा दें।
  • स्वच्छता और व्यवस्था: रसोईघर को हमेशा साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखें। रात को सोने से पहले जूठे बर्तन धो लें। गंदा रसोईघर दरिद्रता को आमंत्रित करता है।
  • खाना बनाने वाले की स्थिति: खाना बनाते समय, व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
  • पानी का बर्तन: रसोईघर में एक साफ पानी का बर्तन (जैसे घड़ा या फिल्टर) उत्तर-पूर्व दिशा में रखना समृद्धि और शांति लाता है।
  • औषधीय पौधे: आप रसोईघर की खिड़की पर तुलसी, पुदीना या अन्य हर्बल पौधे लगा सकते हैं। ये न केवल हवा को शुद्ध करते हैं बल्कि सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करते हैं।
  • डाइनिंग टेबल: यदि रसोईघर में डाइनिंग टेबल है, तो उसे दीवार से सटाकर न रखें और उसे दक्षिण-पूर्व दिशा से दूर रखें। उत्तर-पश्चिम या उत्तर दिशा उपयुक्त हो सकती है।
  • अग्नि और जल का संतुलन: रसोई में अग्नि और जल तत्वों को कभी भी सीधे एक दूसरे के सामने या बहुत करीब न रखें। हमेशा बीच में कुछ जगह या एक अवरोध रखें।
  • भोजन करते समय: परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ बैठकर भोजन करना चाहिए। भोजन करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करना शुभ होता है।
  • पहला निवाला: हमेशा पहली रोटी गाय को या पक्षियों को खिलाएं। यह अन्नपूर्णा देवी का सम्मान करने और घर में भोजन की बरकत बनाए रखने का प्रतीक है।

वास्तु दोष निवारण के सरल उपाय (यदि रसोईघर आदर्श दिशा में न हो)

यदि आपका रसोईघर वास्तु नियमों के अनुसार नहीं बना है और आप उसमें बड़े बदलाव नहीं कर सकते, तो कुछ सरल उपाय अपनाकर वास्तु दोषों के नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है:

  • रंगों का प्रयोग: यदि रसोईघर गलत दिशा में है, तो दीवारों पर उपयुक्त रंगों का प्रयोग करें। उदाहरण के लिए, यदि रसोई उत्तर-पूर्व में है, तो हल्के पीले या क्रीम रंग का प्रयोग करके अग्नि के प्रभाव को कम करने का प्रयास करें।
  • दर्पण का उपयोग: दर्पणों का उपयोग बहुत सावधानी से करना चाहिए। यदि आपका गैस स्टोव मुख्य द्वार से दिखाई नहीं देता है, तो आप ऐसी जगह दर्पण लगा सकते हैं जहां से खाना बनाने वाले व्यक्ति को दरवाजा दिखे, लेकिन ध्यान रहे कि दर्पण में आग की लपटें सीधे परावर्तित न हों, अन्यथा यह अग्नि तत्व को बढ़ा देगा।
  • वास्तु पिरामिड: वास्तु पिरामिड या क्रिस्टल को रसोईघर के दोषपूर्ण कोने में रखने से नकारात्मक ऊर्जा को बेअसर करने में मदद मिल सकती है।
  • पौधे: कुछ पौधे जैसे तुलसी या मनी प्लांट सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं। इन्हें रसोईघर की खिड़की या शेल्फ पर रखा जा सकता है।
  • समुद्री नमक: एक कटोरी में समुद्री नमक भरकर रसोईघर के किसी कोने में रखें और हर हफ्ते बदलें। यह नकारात्मक ऊर्जा को सोखने में मदद करता है।
  • अग्निहोत्र/दीपक: सुबह-शाम रसोईघर में एक छोटा सा दीपक जलाना अग्नि तत्व को सक्रिय और संतुलित रखने में मदद करता है।
  • पानी का बर्तन: यदि रसोई गलत दिशा में है और अग्नि तत्व असंतुलित है, तो एक छोटे से मिट्टी के घड़े या तांबे के बर्तन में पानी भरकर उत्तर-पूर्व कोने में रखें।
  • मूंगफली के छिलके/लहसुन की कलियां: इन्हें दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखने से भी कुछ हद तक वास्तु दोषों का निवारण होता है।
  • स्वस्तिक चिन्ह: रसोई के द्वार पर बाहर की ओर सिंदूर से या स्टीकर के रूप में स्वस्तिक का चिन्ह बनाना शुभ माना जाता है।

रसोईघर में ऊर्जा संतुलन का महत्व

अंततः, रसोईघर में वास्तु नियमों का पालन करने का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा के संतुलन को बनाए रखना है। एक संतुलित रसोईघर वह स्थान होता है जहाँ अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी और आकाश के तत्व सद्भाव में काम करते हैं। जब ये तत्व संतुलन में होते हैं, तो यह सीधे तौर पर घर के सदस्यों के स्वास्थ्य, धन और मानसिक शांति पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। वास्तु-अनुरूप रसोईघर न केवल भोजन को पौष्टिक बनाता है, बल्कि यह परिवार के रिश्तों में गर्माहट, आर्थिक स्थिति में स्थिरता और जीवन में समग्र सुख-शांति लाता है। यह वह स्थान है जहाँ से पूरे घर में ऊर्जा का प्रवाह होता है, इसलिए इसका शुद्ध, संतुलित और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण होना अत्यंत आवश्यक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: अगर रसोई दक्षिण-पूर्व में न हो तो क्या करें?

उत्तर: यदि आपका रसोईघर दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) में नहीं है, तो सबसे पहले आप इसे उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) में बनाने का विचार कर सकते हैं, यदि संभव हो। यदि यह भी संभव न हो, तो वास्तु दोष निवारण के उपाय अपनाएं। दीवारों पर हल्के पीले, क्रीम या नारंगी रंग का उपयोग करें। एक कटोरी में समुद्री नमक रखें और नियमित रूप से बदलें। अग्नि और जल तत्वों को संतुलित करने के लिए उचित स्थान पर वास्तु पिरामिड या तांबे का बर्तन रखें। गैस स्टोव को दक्षिण-पूर्व के सबसे करीब के कोने में रखें और खाना बनाते समय अपना मुख पूर्व दिशा में रखें।

Q2: गैस स्टोव किस दिशा में मुख करके खाना बनाना चाहिए?

उत्तर: खाना बनाते समय व्यक्ति का मुख पूर्व दिशा की ओर होना सबसे शुभ होता है। यदि यह संभव न हो, तो उत्तर दिशा भी स्वीकार्य है। पूर्व दिशा में मुख करके खाना बनाने से स्वास्थ्य बेहतर होता है और सकारात्मक ऊर्जा आती है।

Q3: रसोई में सिंक और गैस स्टोव पास-पास हों तो क्या करें?

उत्तर: सिंक (जल तत्व) और गैस स्टोव (अग्नि तत्व) को पास-पास रखना वास्तु के अनुसार एक गंभीर दोष है, क्योंकि यह तत्वों का टकराव है। यदि इन्हें दूर करना संभव न हो, तो आप इनके बीच एक लकड़ी का विभाजन, एक चीनी मिट्टी का बर्तन या एक छोटा पौधा रख सकते हैं। यह नकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बाधित करने में मदद करेगा।

Q4: फ्रिज की सही दिशा क्या है?

उत्तर: फ्रिज को रसोईघर के दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पश्चिम, दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखना चाहिए। इसे कभी भी उत्तर-पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा में नहीं रखना चाहिए, क्योंकि यह इन पवित्र और अग्नि को समर्पित दिशाओं में तत्वों का असंतुलन पैदा कर सकता है।

Q5: रसोईघर में कौन से रंग शुभ होते हैं?

उत्तर: रसोईघर के लिए नारंगी, लाल (हल्के शेड), पीला, क्रीम और चॉकलेट ब्राउन जैसे रंग शुभ माने जाते हैं। ये रंग अग्नि तत्व को बढ़ावा देते हैं और सकारात्मकता लाते हैं। गहरे नीले, काले या गहरे भूरे रंगों से बचना चाहिए।

Q6: रसोई में कूड़ेदान कहाँ रखें?

उत्तर: कूड़ेदान को रसोईघर के उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम कोने में रखना सबसे अच्छा होता है। इसे ऐसी जगह रखें जहां यह आसानी से दिखाई न दे और मुख्य द्वार से दूर हो। इसे हमेशा ढंक कर रखें और नियमित रूप से खाली करें।

Q7: रसोईघर में झाड़ू-पोछा कहाँ रखें?

उत्तर: झाड़ू-पोछा जैसी सफाई की वस्तुओं को नकारात्मकता से जोड़ा जाता है, इसलिए इन्हें रसोईघर में ऐसी जगह रखना चाहिए जहाँ वे तुरंत दिखाई न दें। इन्हें दक्षिण-पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में किसी बंद कैबिनेट या स्टोर रूम में रखना सबसे अच्छा होता है। इन्हें कभी भी उत्तर-पूर्व या रसोई के मुख्य क्षेत्र में न रखें।

निष्कर्ष

वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों का पालन करके रसोईघर को व्यवस्थित करना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण है जो हमारे जीवन में संतुलन और सकारात्मकता लाता है। एक वास्तु-अनुरूप रसोईघर न केवल स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन तैयार करने में मदद करता है, बल्कि यह परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य, धन और समग्र कल्याण पर भी गहरा प्रभाव डालता है। सही दिशा में रसोईघर का निर्माण, उपकरणों की सटीक स्थिति, उपयुक्त रंगों का चुनाव और स्वच्छता बनाए रखना—ये सभी कारक मिलकर आपके घर में सुख, शांति और समृद्धि को आकर्षित करते हैं। यदि आप अपने रसोईघर में बड़े बदलाव नहीं कर सकते हैं, तो छोटे-छोटे वास्तु उपाय अपनाकर भी नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है। याद रखें, आपका रसोईघर आपके घर की ऊर्जा का स्रोत है; इसे सकारात्मकता और सद्भाव से परिपूर्ण रखें ताकि आपके जीवन में भी यही ऊर्जा प्रवाहित हो सके।

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