बेसमेंट के लिए वास्तु टिप्स: सही दिशा और उपाय

बेसमेंट के लिए वास्तु टिप्स: सही दिशा और उपाय - अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा लाएं

बेसमेंट के लिए वास्तु टिप्स: सही दिशा और उपाय

आधुनिक शहरी जीवन में जगह की कमी एक बड़ी चुनौती है, और ऐसे में घर के नीचे बने बेसमेंट अतिरिक्त स्थान प्रदान करते हैं। बेसमेंट का उपयोग अक्सर भंडारण, मनोरंजन कक्ष, जिम या यहां तक कि अतिरिक्त बेडरूम के रूप में भी किया जाता है। हालांकि, वास्तु शास्त्र के अनुसार, बेसमेंट में ऊर्जा का प्रवाह ऊपरी मंजिलों से भिन्न होता है, और यदि इसे सही ढंग से डिजाइन और प्रबंधित नहीं किया जाता है, तो यह घर में नकारात्मक ऊर्जा ला सकता है या निवासियों के स्वास्थ्य और धन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इस विस्तृत लेख में, हम बेसमेंट के लिए वास्तु के सिद्धांतों, सही दिशाओं, और विभिन्न उपायों पर गहराई से चर्चा करेंगे, ताकि आपका बेसमेंट आपके लिए शुभ और लाभदायक सिद्ध हो सके।

बेसमेंट का महत्व और वास्तु संबंधी चुनौतियाँ

बेसमेंट एक घर का वह हिस्सा होता है जो पूरी तरह या आंशिक रूप से जमीन के नीचे बना होता है। यह अतिरिक्त जगह प्रदान करता है जो कई उद्देश्यों के लिए उपयोग की जा सकती है। भारतीय संस्कृति में, खासकर वास्तु शास्त्र में, जमीन से ऊपर की संरचनाओं को अधिक महत्व दिया गया है, क्योंकि वे सीधे सूर्य के प्रकाश और प्राकृतिक वायु के संपर्क में रहती हैं। बेसमेंट में प्राकृतिक प्रकाश और हवा की कमी, साथ ही जमीन के भीतर होने के कारण उत्पन्न होने वाली भारी ऊर्जा, इसे वास्तु के दृष्टिकोण से थोड़ा जटिल बना देती है।

वास्तु शास्त्र 'पंचमहाभूत' (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) के संतुलन पर आधारित है। बेसमेंट में, पृथ्वी तत्व की प्रधानता होती है, और अन्य तत्वों का संतुलन बिगड़ सकता है। यदि बेसमेंट को बिना वास्तु सिद्धांतों का पालन किए बनाया या उपयोग किया जाता है, तो यह निम्न समस्याएं उत्पन्न कर सकता है:

  • नकारात्मक ऊर्जा का संचय: कम प्रकाश और हवा के कारण नकारात्मक या स्थिर ऊर्जा जमा हो सकती है।
  • स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं: नमी, खराब वेंटिलेशन और सूर्य के प्रकाश की कमी के कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं।
  • वित्तीय अस्थिरता: वास्तु दोष के कारण धन हानि या वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
  • पारिवारिक कलह: घर के सदस्यों के बीच तनाव और असामंजस्य बढ़ सकता है।

वास्तु शास्त्र के अनुसार बेसमेंट की सही दिशा

बेसमेंट का निर्माण करते समय, उसकी दिशा का चुनाव अत्यंत महत्वपूर्ण है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, कुछ दिशाएं बेसमेंट के लिए अनुकूल मानी जाती हैं, जबकि कुछ से बचना चाहिए।

1. बेसमेंट के लिए शुभ दिशाएं

  • उत्तर दिशा (North): उत्तर दिशा को धन और समृद्धि का स्वामी कुबेर की दिशा माना जाता है। इस दिशा में बेसमेंट बनाना बहुत शुभ माना जाता है, खासकर यदि इसका उपयोग कार्यालय, अध्ययन कक्ष या मनोरंजन कक्ष के रूप में किया जाए। उत्तर दिशा से आने वाली सकारात्मक ऊर्जा बेसमेंट में रहने वालों के लिए लाभकारी होती है।
  • पूर्व दिशा (East): पूर्व दिशा सूर्योदय की दिशा है और इसे ऊर्जा, स्वास्थ्य और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। पूर्व दिशा में बेसमेंट का निर्माण करने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। यह दिशा जिम, योग कक्ष या भंडारण के लिए भी अच्छी है, बशर्ते पर्याप्त वेंटिलेशन और प्रकाश की व्यवस्था हो।
  • उत्तर-पूर्व दिशा (North-East): यह दिशा 'ईशान कोण' कहलाती है और इसे अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। यह दिशा जल तत्व से संबंधित है और देवताओं का स्थान मानी जाती है। हालांकि, बेसमेंट के लिए यह दिशा बहुत गहरी नहीं होनी चाहिए। यदि इस दिशा में बेसमेंट है, तो उसे साफ-सुथरा और प्रकाशमय रखना अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा यह स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है।

2. बेसमेंट के लिए अशुभ दिशाएं (जिनसे बचें)

  • दक्षिण दिशा (South): दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना जाता है और इसे बेसमेंट के लिए अशुभ माना जाता है। इस दिशा में बेसमेंट होने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और वित्तीय परेशानियां हो सकती हैं।
  • पश्चिम दिशा (West): पश्चिम दिशा भी बेसमेंट के लिए बहुत अनुकूल नहीं मानी जाती है। यह दिशा भारीपन और ठहराव से जुड़ी है। यदि इस दिशा में बेसमेंट है, तो यह घर के सदस्यों के जीवन में ठहराव ला सकता है या उन्हें आलसी बना सकता है।
  • दक्षिण-पश्चिम दिशा (South-West): यह दिशा 'नैऋत्य कोण' कहलाती है और इसे भारी और स्थिर ऊर्जा का क्षेत्र माना जाता है। इस दिशा में बेसमेंट का निर्माण करने से घर के मुखिया और निवासियों के जीवन में स्थिरता और संबंध खराब हो सकते हैं। इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं और वित्तीय नुकसान भी हो सकते हैं।
  • दक्षिण-पूर्व दिशा (South-East): यह दिशा 'आग्नेय कोण' कहलाती है और अग्नि तत्व से संबंधित है। इस दिशा में बेसमेंट का निर्माण करने से अग्नि तत्व का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे घर में आग लगने का खतरा या परिवार में कलह बढ़ सकती है।

सारांश: आदर्श रूप से, बेसमेंट का निर्माण घर के उत्तरी या पूर्वी भाग में होना चाहिए। यदि पूरे घर के नीचे बेसमेंट बनाना अनिवार्य हो, तो उसे केवल उत्तरी या पूर्वी हिस्से में गहरा रखा जा सकता है, जबकि दक्षिणी और पश्चिमी हिस्से में हल्का या कम गहरा होना चाहिए।

बेसमेंट के लिए वास्तु उपाय और सुझाव

यदि आपके पास पहले से ही बेसमेंट है या आप एक नए बेसमेंट का निर्माण कर रहे हैं, तो वास्तु सिद्धांतों का पालन करके आप वहां सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर सकते हैं।

1. प्रकाश व्यवस्था (Lighting)

  • पर्याप्त रोशनी: बेसमेंट को हमेशा अच्छी तरह से प्रकाशित रखना चाहिए। प्राकृतिक प्रकाश की कमी को पूरा करने के लिए कृत्रिम रोशनी का भरपूर उपयोग करें। पीली रोशनी या गर्म सफेद रोशनी (warm white light) का उपयोग करना बेहतर होता है, क्योंकि यह अधिक आरामदायक और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।
  • खिड़कियां और वेंटिलेशन: यदि संभव हो, तो बेसमेंट में छोटी खिड़कियां या वेंटिलेशन शॉफ्ट बनाएं ताकि थोड़ी सी प्राकृतिक रोशनी और हवा अंदर आ सके।
  • दर्पण का उपयोग: दीवारों पर बड़े दर्पण लगाएं। दर्पण प्रकाश को परावर्तित करते हैं और स्थान को बड़ा और उज्ज्वल दिखाते हैं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

2. रंगों का प्रयोग (Use of Colors)

  • हल्के और चमकीले रंग: बेसमेंट की दीवारों के लिए हल्के और चमकीले रंगों का चुनाव करें, जैसे कि क्रीम, हल्का पीला, हल्का नीला, पिस्ता हरा या सफेद। ये रंग प्रकाश को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करते हैं और स्थान को अधिक खुला और हवादार महसूस कराते हैं।
  • गहरे रंगों से बचें: गहरे रंग, जैसे कि गहरा नीला, भूरा या काला, बेसमेंट को और अधिक भारी और उदास बना सकते हैं।

3. हवा का संचार (Ventilation)

  • नमी और दुर्गंध: बेसमेंट में नमी और दुर्गंध एक आम समस्या है। सुनिश्चित करें कि पर्याप्त वेंटिलेशन हो। एग्जॉस्ट फैन लगाएं और समय-समय पर हवा आने-जाने के लिए दरवाजे खुले रखें।
  • डीह्यूमिडिफायर का उपयोग: यदि नमी की समस्या गंभीर है, तो डीह्यूमिडिफायर का उपयोग करें। नमी नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है और स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनती है।

4. पानी का निकास (Water Drainage)

  • जल निकासी: बेसमेंट में पानी का जमाव या लीकेज बहुत अशुभ माना जाता है। सुनिश्चित करें कि जल निकासी की व्यवस्था अच्छी हो और कहीं भी पानी स्थिर न हो। पानी का ठहराव नकारात्मक ऊर्जा और बीमारियों को आकर्षित करता है।

5. सामान का भंडारण (Storage of Items)

  • व्यवस्थित रखें: बेसमेंट का उपयोग अक्सर अनावश्यक सामान रखने के लिए किया जाता है। इसे साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखें। कबाड़ या टूटी हुई चीजें बेसमेंट में न रखें, क्योंकि वे नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं।
  • क्या स्टोर करें: बेसमेंट का उपयोग उन वस्तुओं के भंडारण के लिए किया जा सकता है जिनकी आपको नियमित रूप से आवश्यकता नहीं होती है, जैसे कि मौसमी कपड़े, पुरानी किताबें, उपकरण आदि।
  • क्या न स्टोर करें: देवी-देवताओं की मूर्तियाँ, पूजा का सामान, महत्वपूर्ण दस्तावेज़ या खाने-पीने की चीजें बेसमेंट में न रखें।

6. सीढ़ियों की दिशा (Staircase Direction)

  • शुभ दिशा: बेसमेंट में जाने वाली सीढ़ियाँ उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में होनी चाहिए। दक्षिण-पश्चिम या दक्षिण दिशा में सीढ़ियाँ अशुभ मानी जाती हैं।
  • घड़ी की दिशा: सीढ़ियां हमेशा घड़ी की दिशा (clockwise) में ऊपर की ओर मुड़नी चाहिए।

7. कमरों का उपयोग (Usage of Rooms in Basement)

बेसमेंट के लिए कुछ उपयोग वास्तु के अनुसार स्वीकार्य हैं, जबकि कुछ से बचना चाहिए:

  • शुभ उपयोग:
    • भंडारण कक्ष (Storage Room): यह बेसमेंट का सबसे आम और सबसे उपयुक्त उपयोग है।
    • मनोरंजन कक्ष (Entertainment Room): होम थिएटर या गेम रूम के लिए यह एक अच्छा स्थान हो सकता है।
    • जिम या व्यायाम कक्ष (Gym/Exercise Room): फिटनेस गतिविधियों के लिए बेसमेंट उपयुक्त है।
    • कार्यालय या अध्ययन कक्ष (Office/Study Room): यदि पर्याप्त प्रकाश और वेंटिलेशन हो, तो यह एकाग्रता के लिए अच्छा स्थान हो सकता है, खासकर उत्तर या पूर्व दिशा में।
  • अशुभ उपयोग (जिनसे बचें):
    • पूजा कक्ष/मंदिर (Pooja Room/Temple): देवी-देवताओं का स्थान हमेशा जमीन से ऊपर होना चाहिए, जहां उन्हें पर्याप्त सूर्य का प्रकाश और शुद्ध हवा मिले।
    • शयनकक्ष (Bedroom): बेसमेंट में सोने से स्वास्थ्य और ऊर्जा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, खासकर यदि यह दीर्घकालिक हो।
    • रसोईघर (Kitchen): बेसमेंट में रसोई घर का निर्माण अग्नि तत्व को बाधित करता है और शुभ नहीं माना जाता है।

8. ऊर्जा संतुलन के लिए उपाय (Energy Balancing Remedies)

  • नमक का पानी: एक कटोरी में समुद्री नमक या सेंधा नमक डालकर बेसमेंट के कोनों में रखें। यह नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित करता है। हर हफ्ते नमक बदल दें।
  • पौधे: कुछ इनडोर पौधे, जैसे स्नेक प्लांट (snake plant) या पीस लिली (peace lily), वायु को शुद्ध करते हैं और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाते हैं। सुनिश्चित करें कि पौधों को जीवित रखने के लिए पर्याप्त रोशनी हो।
  • पिरामिड: नकारात्मक ऊर्जा को बेअसर करने और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए बेसमेंट के कोनों में छोटे वास्तु पिरामिड रखे जा सकते हैं।
  • दीवारों पर तस्वीरें/पेंटिंग: जीवंत और सकारात्मक दृश्यों वाली तस्वीरें या पेंटिंग लगाएं, जैसे उगते सूरज, हरे-भरे परिदृश्य या बहते पानी की तस्वीरें।
  • संगीत या मंत्र: कभी-कभी बेसमेंट में हल्के शास्त्रीय संगीत या मंत्रों का जाप करना या बजाना वातावरण को शुद्ध कर सकता है।

बेसमेंट में सामान्य वास्तु दोष और उनका निवारण

अक्सर बेसमेंट में कुछ सामान्य वास्तु दोष पाए जाते हैं, जिनका निवारण करना महत्वपूर्ण है:

  • अंधेरा और नमी: यह सबसे आम समस्या है। इसका निवारण ऊपर बताए गए अनुसार पर्याप्त रोशनी, वेंटिलेशन और डीह्यूमिडिफायर का उपयोग करके किया जा सकता है। दीवारों पर हल्के रंग का पेंट करें।
  • दक्षिण-पश्चिम में प्रवेश: यदि बेसमेंट का मुख्य प्रवेश द्वार दक्षिण-पश्चिम दिशा में है, तो यह गंभीर वास्तु दोष है। इस दोष को कम करने के लिए प्रवेश द्वार पर तांबे के पिरामिड या 'ॐ' या 'स्वस्तिक' जैसे शुभ चिन्ह लगाएं। मुख्य द्वार को हमेशा साफ और अच्छी तरह से प्रकाशित रखें।
  • अव्यवस्थित और कबाड़ से भरा बेसमेंट: बेसमेंट में कभी भी कबाड़ इकट्ठा न होने दें। नियमित सफाई करें और अनावश्यक वस्तुओं को हटा दें। साफ-सुथरा और व्यवस्थित स्थान सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है।
  • बेसमेंट का ऊपरी मंजिल से भी गहरा होना: यदि बेसमेंट ऊपरी मंजिल की तुलना में बहुत गहरा है, तो यह ऊर्जा के प्रवाह को बाधित कर सकता है। यदि ऐसा है, तो बेसमेंट में छत की ऊँचाई को बढ़ाने के लिए उपाय करें (यदि संभव हो)।

बेसमेंट में किन चीजों से बचें

  • अनावश्यक भारी मशीनरी: यदि आप बेसमेंट में भारी मशीनरी रखते हैं, तो सुनिश्चित करें कि वे दक्षिण या पश्चिम दिशा में हों। उत्तर या पूर्व दिशा में भारी सामान रखने से बचें।
  • मृत या सूखे पौधे: बेसमेंट में सूखे या मुरझाए हुए पौधे न रखें, क्योंकि ये नकारात्मकता बढ़ाते हैं।
  • टूटी हुई वस्तुएं: किसी भी प्रकार की टूटी हुई वस्तुएं, जैसे फर्नीचर, उपकरण या बर्तन, बेसमेंट में न रखें। उन्हें या तो ठीक करें या हटा दें।
  • पानी से भरे कंटेनर: बेसमेंट में खुले पानी से भरे कंटेनर या बाल्टी न रखें, खासकर अगर वहां नमी की समस्या हो।
  • हिंसक या नकारात्मक चित्र: बेसमेंट में ऐसे चित्र या पेंटिंग न लगाएं जो उदासी, हिंसा या नकारात्मकता को दर्शाते हों।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. क्या बेसमेंट घर में होना अच्छा है?

वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि बेसमेंट का निर्माण और उपयोग सही दिशाओं और सिद्धांतों के अनुसार किया जाए, तो यह घर के लिए अतिरिक्त उपयोगी स्थान हो सकता है। हालांकि, यदि वास्तु नियमों का पालन नहीं किया जाता है, तो यह नकारात्मक ऊर्जा ला सकता है। आदर्श रूप से, बेसमेंट को घर के उत्तरी या पूर्वी हिस्से में बनाया जाना चाहिए और कभी भी पूरे प्लॉट के नीचे नहीं होना चाहिए।

2. बेसमेंट के लिए सबसे अच्छी दिशा कौन सी है?

वास्तु के अनुसार, बेसमेंट के लिए सबसे अच्छी दिशाएं उत्तर और पूर्व हैं। उत्तर-पूर्व दिशा को भी शुभ माना जाता है, लेकिन इसे बहुत गहरा नहीं होना चाहिए। दक्षिण, पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व दिशाओं में बेसमेंट बनाने से बचना चाहिए, क्योंकि ये नकारात्मक ऊर्जा और समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं।

3. बेसमेंट में क्या नहीं रखना चाहिए?

बेसमेंट में देवी-देवताओं की मूर्तियाँ, पूजा का सामान, महत्वपूर्ण दस्तावेज़, खाने-पीने की चीजें, औषधियां, टूटी हुई या खराब वस्तुएं, और भारी मशीनरी (उत्तर या पूर्व दिशा में) नहीं रखनी चाहिए। कबाड़ और अनुपयोगी सामान का भंडारण करने से भी बचें।

4. बेसमेंट में सोने से क्या होता है?

वास्तु शास्त्र बेसमेंट में नियमित रूप से सोने की सलाह नहीं देता है। बेसमेंट में प्राकृतिक प्रकाश और ताजी हवा की कमी के कारण नकारात्मक या भारी ऊर्जा का प्रभाव हो सकता है, जिससे अनिद्रा, बेचैनी, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और मानसिक तनाव हो सकता है। यह शरीर की ऊर्जा को भी कम कर सकता है।

5. बेसमेंट में मंदिर रख सकते हैं?

नहीं, वास्तु के अनुसार बेसमेंट में मंदिर या पूजा कक्ष बनाना अत्यंत अशुभ माना जाता है। देवी-देवताओं का स्थान हमेशा घर के ऊपरी हिस्से में होना चाहिए, जहां उन्हें पर्याप्त सूर्य का प्रकाश और शुद्ध हवा मिले। बेसमेंट में पूजा करने से सकारात्मक परिणाम नहीं मिलते हैं और यह नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकता है।

6. बेसमेंट में टॉयलेट कैसा होना चाहिए?

यदि बेसमेंट में टॉयलेट बनाना अनिवार्य हो, तो उसे घर के उत्तर-पश्चिम (वायु कोण) या दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) दिशा में बनाया जा सकता है, लेकिन दक्षिण-पश्चिम या उत्तर-पूर्व दिशा में बिल्कुल नहीं। टॉयलेट को हमेशा साफ-सुथरा और सूखा रखना चाहिए, और उसका दरवाजा बंद रखना चाहिए। पर्याप्त वेंटिलेशन और एग्जॉस्ट फैन लगाना अनिवार्य है।

7. बेसमेंट में पढ़ाई करने से क्या फायदा या नुकसान होता है?

यदि बेसमेंट वास्तु के अनुसार सही दिशा (उत्तर या पूर्व) में बना है, पर्याप्त रोशनी और हवादार है, और उसमें सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह है, तो यह पढ़ाई के लिए एक शांत और एकाग्रतापूर्ण वातावरण प्रदान कर सकता है। हालांकि, यदि बेसमेंट अंधेरा, नम और नकारात्मक ऊर्जा से भरा है, तो यह एकाग्रता में बाधा डाल सकता है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। बच्चों को बेसमेंट में नियमित रूप से पढ़ने से बचाना चाहिए।

8. बेसमेंट में घर का मुख्य द्वार या प्रवेश द्वार बनाना उचित है?

नहीं, वास्तु शास्त्र में बेसमेंट में घर का मुख्य प्रवेश द्वार बनाना शुभ नहीं माना जाता है। घर का मुख्य द्वार हमेशा जमीन से ऊपर होना चाहिए ताकि सीधी सूर्य की रोशनी और सकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश कर सके। बेसमेंट में मुख्य द्वार होने से घर में आने वाली ऊर्जा बाधित होती है और नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, खासकर वित्तीय स्थिरता पर।

निष्कर्ष

बेसमेंट एक मूल्यवान स्थान है जो यदि वास्तु सिद्धांतों के अनुसार डिजाइन और प्रबंधित किया जाए, तो आपके घर में सकारात्मकता और समृद्धि ला सकता है। सही दिशा का चुनाव, पर्याप्त प्रकाश और वेंटिलेशन, उचित रंग योजना, और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए छोटे-छोटे उपाय बेसमेंट को एक शुभ और उपयोगी स्थान में बदल सकते हैं। याद रखें, वास्तु शास्त्र केवल निर्माण के बारे में नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा के संतुलन और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने का विज्ञान है। अपने बेसमेंट को इन सरल वास्तु टिप्स के साथ अनुकूलित करके, आप अपने और अपने परिवार के लिए एक स्वस्थ, खुशहाल और समृद्ध वातावरण बना सकते हैं।

वास्तु एक गहरा विज्ञान है और प्रत्येक घर की अपनी अनूठी ऊर्जा होती है। इन सामान्य दिशानिर्देशों का पालन करना एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन यदि आप किसी विशेष समस्या का सामना कर रहे हैं या एक नया बेसमेंट बना रहे हैं, तो किसी अनुभवी वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लेना हमेशा सबसे अच्छा होता है।

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